जट से कृषि को नई दिशा की उम्मीद! विशेषज्ञों ने उर्वरक, मशीनीकरण और डेयरी पर रखीं बड़ी मांगें

आने वाले केंद्रीय बजट को लेकर कृषि और उससे जुड़े उद्योगों में काफी उम्मीदें जताई जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बजट खेती को आधुनिक, मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम साबित हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में तकनीक और योजनाओं के स्तर पर बदलाव हुए हैं, लेकिन अब भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां नीतिगत सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है।

उर्वरक क्षेत्र में सुधार की मांग

उर्वरक उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि उर्वरक क्षेत्र से जुड़े पुराने नियमों में बदलाव समय की जरूरत बन गया है। डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने, अनावश्यक कागजी प्रक्रिया कम करने और नियमों को सरल बनाने की मांग की जा रही है। साथ ही पोषक तत्वों से भरपूर खेती को बढ़ावा देने और फसलों में रसायन अवशेष कम करने की दिशा में नीति स्तर पर कदम उठाने की जरूरत बताई गई है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि घुलनशील, जैविक और सूक्ष्म पोषक तत्वों वाले उर्वरकों को विशेष महत्व देने से किसानों को बेहतर गुणवत्ता के विकल्प मिल सकते हैं।

‘मेक इन इंडिया’ और अनुसंधान पर जोर

कृषि रसायन और फसल सुरक्षा उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू कंपनियों को अनुसंधान और विकास में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलना चाहिए। अगर नए अणु और आधुनिक फॉर्मूलेशन देश में ही विकसित होंगे तो लंबे समय में किसानों को सस्ते और बेहतर उत्पाद मिल सकेंगे। उद्योग जगत ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं को आसान बनाने की भी मांग की है, ताकि देश में नए कारखाने लगें और रोजगार बढ़े।

कृषि मशीनीकरण और ड्रोन तकनीक

कृषि उपकरण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग ग्रामीण इलाकों में मशीनीकरण बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अभी देश में कृषि मशीनीकरण का स्तर सीमित है, इसलिए आसान ऋण और ब्याज सहायता जैसी योजनाएं मददगार हो सकती हैं। ड्रोन तकनीक को भी खेती में तेजी से अपनाया जा रहा है, ऐसे में स्वदेशी ड्रोन निर्माण को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है ताकि लागत कम हो और तकनीक गांव तक पहुंचे।

डेयरी क्षेत्र में निर्यात की संभावना

भारत दूध उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन डेयरी उत्पादों के निर्यात में हिस्सेदारी अभी सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि दूध की गुणवत्ता सुधारने, डिजिटल खरीद प्रणाली मजबूत करने और कोल्ड चेन ढांचे को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाए तो किसानों को ज्यादा फायदा मिल सकता है। पनीर, मक्खन जैसे मूल्य-वर्धित उत्पादों पर ध्यान देने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अवसर बढ़ सकते हैं।

फसल सुरक्षा में नई तकनीक की जरूरत

जलवायु परिवर्तन और कीटों के बदलते स्वरूप को देखते हुए फसल सुरक्षा क्षेत्र में नई तकनीक और शोध पर निवेश की जरूरत बताई गई है। कम मात्रा में असरदार उत्पाद किसानों के लिए फायदेमंद माने जा रहे हैं, क्योंकि इससे लागत कम होगी और पर्यावरण पर दबाव भी घटेगा।

कुल मिलाकर, बजट से उम्मीद यही है कि खेती को परंपरागत ढांचे से आगे बढ़ाकर तकनीक आधारित और टिकाऊ मॉडल की ओर ले जाने वाले कदम उठाए जाएं, ताकि किसान की आमदनी और खेती की मजबूती दोनों बढ़ सकें।

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  • Shashikant

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