देश में गन्ना खेतों में रोपाई का मौसम आते ही किसान भाई चिंता में पड़ जाते हैं। मजदूरों की तलाश, बीज का ढेर और पानी की बर्बादी ये सब तो आम बात है। लेकिन अब कोयंबटूर के आईसीएआर वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मशीन ईजाद कर दी है जो इन सारी मुश्किलों को दूर कर देगी। मिनी ट्रैक्टर से चलने वाली यह ‘शुगरकेन सेटलिंग ट्रांसप्लांटर’ गन्ने की रोपाई को तेज, सटीक और सस्ता बना देगी। छोटे-मध्यम किसानों के लिए बनी यह मशीन 73 फीसदी तक मजदूरी की जरूरत घटा देगी, और समय में आधी कटौती करेगी। गन्ना विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पैदावार भी 20 फीसदी तक बढ़ सकती है।
मशीन कैसे बदलेगी गन्ना रोपाई का पुराना तरीका
पहले गन्ने की रोपाई में हफ्तों लग जाते थे। मजदूर सेटल्स को हाथ से एक-एक कर लगाते, दूरी भी बराबर न रहती। लेकिन यह नई मशीन मिनी ट्रैक्टर से जुड़कर खेत में सीधी लाइनें खींच देगी। गन्ने के बड चिप्स या सिंगल बड सेट से बने क्लोनिंग पौधों को बराबर दूरी पर लगाएगी। आईसीएआर-सुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग के वैज्ञानिकों ने इसे छोटे खेतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है।
समय, बीज और पानी की बड़ी बचत, पैदावार में इजाफा
इस मशीन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि रोपाई का काम आधा समय ले लेगी। जहां पहले एक हेक्टेयर में हफ्ता भर लगता था, अब दो-तीन दिन में निपट जाएगा। बीज की खपत 8-10 टन से घटकर बहुत कम हो जाएगी, क्योंकि सटीक रोपाई से बर्बादी रुकेगी। पानी की भी बचत होगी, क्योंकि जड़ें सही जगह लगेंगी तो सिंचाई कम लगेगी। वैज्ञानिकों के टेस्ट में पैदावार में 15-20 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। तमिलनाडु के एक ट्रायल में किसानों ने पाया कि मशीन से लगी फसल में गन्ने की लंबाई और मोटाई दोनों ही बेहतर हुई।
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छोटे किसानों के लिए खास, कैसे लगेगी खेत में
यह ट्रांसप्लांटर 8-10 हॉर्स पावर के मिनी ट्रैक्टर से चलेगी, जो ज्यादातर छोटे किसानों के पास होता है। मशीन को खेत की मिट्टी में आसानी से चला सकते हैं, और यह बड चिप्स को सही गहराई पर दबा देगी। मजदूरी की बचत 73 फीसदी तक होगी, यानी जहां 10 मजदूर लगते थे, वहां दो-तीन ही काफी। लागत भी पुरानी मशीनों से कम है, क्योंकि बीज कम लगेंगे तो खर्च 20 फीसदी घटेगा। आईसीएआर के अनुसार, महाराष्ट्र, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश के किसान इसे सबसे पहले अपना सकते हैं। अगर आपके पास मिनी ट्रैक्टर है तो लोकल कृषि केंद्र से संपर्क करें वहां डेमो और सब्सिडी की जानकारी मिलेगी।
आईसीएआर की यह खोज गन्ना किसानों के लिए सच्चा सहारा साबित होगी। कम मेहनत से ज्यादा पैदावार, पानी-बीज की बचत ये सब मिलकर खेती को मुनाफे का धंधा बना देंगे। 2025 के इस रोपाई सीजन में अगर आप इसे आजमा लें तो अगली कटाई में फर्क दिखेगा। विभाग ने कहा है कि जल्द ही इसे बाजार में लाया जाएगा, और सरकारी योजनाओं में सब्सिडी भी मिलेगी।
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