भावांतर योजना पर किसानों का गुस्सा फूटा, इंदौर मंडी बंद – सोयाबीन के दाम में भारी गिरावट

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के किसान भाइयों का सब्र अब टूट गया है। गुरुवार को लक्ष्मी नगर अनाज मंडी में सोयाबीन की नीलामी शुरू होते ही हंगामा मच गया। व्यापारियों पर सिंडिकेट बनाकर कीमतें गिराने का आरोप लगाते हुए किसानों ने मंडी ही बंद करा दी। करीब पांच घंटे तक नीलामी का काम ठप रहा, और नारे लगते रहे। कल तक 4200 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाला सोयाबीन आज 4000 रुपये से भी नीचे आ गया। किसान कहते हैं कि भावांतर भुगतान योजना का नाम लेकर व्यापारी उनका शोषण कर रहे हैं। यह घटना न सिर्फ इंदौर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के सोयाबीन बेल्ट के लिए चेतावनी है।

मंडी में हंगामा

सुबह होते ही लक्ष्मी नगर मंडी पहुंचे किसान जब सोयाबीन के भाव देखे तो आग बबूला हो गए। एक दिन में ही 200 रुपये से ज्यादा की गिरावट ने सबको झकझोर दिया। वे मंडी परिसर में घुस गए, नारे लगाए और नीलामी रोक दी। जिला अधिकारियों ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान टस से मस न हुए। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बबलू जाधव, रामस्वरूप मंत्री, चंदनसिंह बड़वारिया और शैलेंद्र पटेल भी मैदान में उतर आए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कीमतों का मसला नहीं, बल्कि सरकार की योजना का गलत इस्तेमाल है। देर शाम तक चले गतिरोध के बाद ही नीलामी दोबारा शुरू हुई।

ये भी पढ़ें- 95 दिन में तैयार, JS 2172 सोयाबीन ने कर दिखाया कमाल, लाखों का मुनाफा पक्का

सोयाबीन के दाम क्यों गिरे

किसानों का दावा है कि व्यापारियों ने मिलीभगत से सिंडिकेट बना लिया है। जानबूझकर बोली कम रखकर सोयाबीन सस्ते में खरीदना चाहते हैं, ताकि बाद में ऊंचे दाम पर बेच सकें। मंडी में आवक तो सामान्य है, लेकिन बोली न होने से भाव लुढ़क गए। फ्री प्रेस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गिरावट अचानक आई, जो संयोग नहीं लगती। मध्य प्रदेश में सोयाबीन की खेती लाखों हेक्टेयर में होती है, और इंदौर जैसी मंडियां इसका केंद्र हैं। अगर कीमतें इसी तरह गिरीं तो किसान कर्ज के जाल में फंस जाएंगे।

भावांतर योजना क्या है

मध्य प्रदेश सरकार ने अक्टूबर 2025 में सोयाबीन के लिए भावांतर भुगतान योजना फिर शुरू की। यह प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट का तरीका है, जहां बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के फर्क की भरपाई सरकार करती है। इस साल सोयाबीन का एमएसपी 4880 रुपये प्रति क्विंटल तय है। अगर मंडी में 4000 रुपये मिले तो 880 रुपये का अंतर सरकार देगी। योजना का स्वागत तो हुआ था, लेकिन अब किसान कहते हैं कि यह व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही। क्योंकि सिंडिकेट से भाव गिरवाकर वे सस्ते में खरीदते हैं, और सरकार का मुआवजा किसान को मिलने का नामोनिशान नहीं। पहली मॉडल कीमत नवंबर की शुरुआत में घोषित होगी, लेकिन तब तक कितना नुकसान हो चुका होगा।

किसान नेताओं का बयान

संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने साफ कहा कि भावांतर योजना किसानों की रक्षा के नाम पर बनी है, लेकिन हकीकत में व्यापारियों का खेल बन गई। बबलू जाधव ने कहा, “किसान को सही दाम नहीं मिल रहा, बिचौलिए मुनाफा कमा रहे।” रामस्वरूप मंत्री ने सरकार से मांग की कि मंडी में निगरानी बढ़े और सिंडिकेट पर कार्रवाई हो। चंदनसिंह बड़वारिया और शैलेंद्र पटेल ने चेतावनी दी कि अगर सुधार न हुए तो आंदोलन और तेज होगा। ये नेता मालवा-निमाड़ क्षेत्र के हैं, जहां सोयाबीन की खेती मुख्य फसल है। उनका कहना है कि योजना में पारदर्शिता की कमी है, जिससे किसान भ्रम में रहते हैं।

ये भी पढ़ें- सोयाबीन की सुपर किस्म RVSM 1135 जो दे रही है 35 क्विंटल पैदावार, हर मौसम में जबरदस्त परफॉर्मेंस!

Author

  • Shashikant

    नमस्ते, मैं शशिकांत। मैं 2 साल से पत्रकारिता कर रहा हूं। मुझे खेती से सम्बंधित सभी विषय में विशेषज्ञता प्राप्‍त है। मैं आपको खेती-किसानी से जुड़ी एकदम सटीक ताजा खबरें बताऊंगा। मेरा उद्देश्य यही है कि मैं आपको 'काम की खबर' दे सकूं। जिससे आप समय के साथ अपडेट रहे, और अपने जीवन में बेहतर कर सके। ताजा खबरों के लिए आप Krishitak.com के साथ जुड़े रहिए।

    View all posts

Leave a Comment