टमाटर की खेती में होगी छप्परफाड़ कमाई, एक्सपर्ट ने बताई ख़ास वैरायटी

किसानों के लिए टमाटर की खेती अब एक बड़ा व्यवसाय बन रही है। नई तकनीकों और उन्नत किस्मों की मदद से कम लागत में अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है। ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी दीपक चंद्रवंशी बताते हैं कि साहो वैरायटी टमाटर की एक ऐसी किस्म है, जो किसानों की पहली पसंद बन चुकी है। यह न सिर्फ ज्यादा उपज देती है, बल्कि फंगस जैसी समस्याओं से भी बचाव करती है। अक्टूबर-नवंबर में इसकी रोपाई करने से किसान प्रति हेक्टेयर 60 टन तक टमाटर उगा सकते हैं, जो बाजार में अच्छे दाम दिलाएगी।

साहो वैरायटी: उच्च पैदावार का राज

साहो वैरायटी टमाटर की खेती को आसान और फायदेमंद बना रही है। यह किस्म छत्तीसगढ़ के मौसम के लिए बिल्कुल फिट बैठती है। दीपक चंद्रवंशी के अनुसार, किसान इसे बड़े स्तर पर अपना रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी है कि यह फसल को मजबूत बनाती है और उपज को बढ़ाती है। पारंपरिक तरीकों से 25 से 50 प्रतिशत ज्यादा पैदावार मिल सकती है। लेकिन इसकी सफलता का राज सही समय पर रोपाई और नई तकनीकों का इस्तेमाल है।

बुवाई का सही समय चुनें

टमाटर की साहो वैरायटी के लिए अक्टूबर से नवंबर का महीना सबसे अच्छा समय है। इस दौरान रोपाई करने से पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं और फसल स्वस्थ रहती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि 15 जनवरी के बाद रोपाई न करें, क्योंकि ठंड बढ़ने से उपज प्रभावित हो सकती है। अगर बरसात के मौसम में खेती करनी हो, तो मई के आखिर या जून के शुरू में रोपाई करें। सही समय पर काम करने से किसान कम मेहनत में ज्यादा फायदा उठा पाएँगे।

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फंगस रोग से बचाव का आसान तरीका

टमाटर की फसल में सबसे बड़ी समस्या विल्टिंग रोग है, जो फंगस से फैलता है। यह मिट्टी और पानी के जरिए पौधों में पहुँचता है, जिससे पौधे मुरझा जाते हैं और उपज कम हो जाती है। अभी तक इसके लिए कोई पक्की दवा नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों ने ग्राफ्टिंग तकनीक निकाल ली है। यह तरीका पहले आम और अमरूद जैसे फलों में इस्तेमाल होता था, लेकिन अब सब्जियों के लिए भी कारगर साबित हो रहा है।

ग्राफ्टिंग तकनीक से दोगुना फायदा

ग्राफ्टिंग में पौधे का निचला हिस्सा यानी जड़ वाला भाग जंगली पौधे से लिया जाता है, जो फंगस के खिलाफ मजबूत होता है। ऊपरी हिस्सा साहो वैरायटी का रखा जाता है, जो अच्छी पैदावार देता है। दोनों को जोड़ने से तैयार ग्राफ्टेड पौधा रोगों से लड़ने में सक्षम हो जाता है। दीपक चंद्रवंशी कहते हैं कि इससे दो फायदे होते हैं: पहला, फसल सुरक्षित रहती है और दूसरा, उपज में भारी इजाफा होता है। ग्राफ्टेड साहो वैरायटी से प्रति हेक्टेयर 60 टन टमाटर उगाया जा सकता है।

किसानों के लिए सुनहरा मौका

साहो वैरायटी और ग्राफ्टिंग तकनीक अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान टमाटर खेती से छप्परफाड़ कमाई कर सकते हैं। यह नया जुगाड़ न सिर्फ लागत बचाता है, बल्कि बाजार में ऊँचे दाम भी दिलाता है। किसान भाई जल्द से जल्द इस तकनीक को आजमाएँ और अपने खेतों को हरा-भरा बनाएँ।

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  • Shashikant

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