Turnip Farming: रबी सीजन की शुरुआत में किसान भाई नकदी फसलों की तलाश में हैं, और शलजम एक ऐसा विकल्प है जो कम मेहनत में अच्छा फायदा दे सकता है। यह जड़ वाली सब्जी न सिर्फ सलाद और व्यंजनों में इस्तेमाल होती है, बल्कि इसके पत्ते भी औषधीय गुणों से भरपूर हैं। मैदानी इलाकों में सर्दी के मौसम में इसकी खेती आसानी से हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि शलजम की उन्नत किस्म पर्पल टॉप वाईट ग्लोब (PTWG) अपनाकर किसान प्रति हेक्टेयर 150 से 180 क्विंटल तक उपज ले सकते हैं। अगर आप भी इस फसल को आजमाना चाहते हैं, तो राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) से सस्ते दामों पर बीज मँगवा सकते हैं।
शलजम की खेती क्यों है फायदेमंद
शलजम की खेती छोटे-बड़े खेतों के लिए उपयुक्त है, क्योंकि यह कम पानी और कम खाद में अच्छी पैदावार देती है। इसके फल और पत्ते दोनों बाजार में अच्छी कीमत पाते हैं। सर्दी में बढ़ने वाली यह फसल 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान जल्दी कमाई शुरू कर सकते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि पारंपरिक फसलों के मुकाबले शलजम से 20-30 प्रतिशत ज्यादा मुनाफा होता है। इसके अलावा, इसके पत्तों का इस्तेमाल चाय या सब्जी में होने से अतिरिक्त आय का स्रोत बन जाता है।
PTWG किस्म: आकार में बड़ी, उपज में श्रेष्ठ
पर्पल टॉप वाईट ग्लोब शलजम की एक बेहतरीन किस्म है, जो आकार में सामान्य से बड़ी होती है। इसका ऊपरी भाग बैंगनी रंग का और अंदर का गूदा सफेद होता है, जो बाजार में आकर्षक लगता है। यह किस्म रोगों के खिलाफ मजबूत है और मिट्टी की विभिन्न स्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करती है। 60-65 दिनों में तैयार होने वाली यह फसल प्रति हेक्टेयर 150-180 क्विंटल उपज दे सकती है। किसान भाई इसकी खेती से न सिर्फ ताजा उपज बेच सकेंगे, बल्कि स्टोरेज करके लंबे समय तक फायदा उठा सकेंगे।
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बीज कहाँ से खरीदें
राष्ट्रीय बीज निगम (एनएससी) किसानों की सुविधा के लिए ऑनलाइन शलजम के PTWG बीज बेच रहा है। आप एनएससी की वेबसाइट पर जाकर आसानी से ऑर्डर कर घर मँगवा सकते हैं। अभी 28 प्रतिशत छूट पर एक पैकेट सिर्फ 51 रुपये में उपलब्ध है। यह बीज प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाला है, जो फसल की शुरुआत से ही मजबूत पौधे देगा। ऑनलाइन खरीदने से समय और मेहनत दोनों बचती है, और किसान सीधे घर बैठे बीज प्राप्त कर सकते हैं।
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— National Seeds Corporation Limited (@NSCLIMITED) October 15, 2025
शलजम की खेती का आसान तरीका
शलजम की खेती के लिए बलुई दोमट या रेतीली मिट्टी सबसे अच्छी रहती है, क्योंकि जड़ों को नरम जमीन की जरूरत होती है। खेत की पहली जुताई अच्छी तरह करें और प्रति एकड़ 60-80 क्विंटल सड़ा हुआ गोबर की खाद मिलाएँ। बुआई पंक्तियों में करें, जहाँ पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20-25 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच 8-10 सेंटीमीटर रखें। बीज बोने के बाद हल्की सिंचाई करें और खरपतवार से बचाव रखें। सही देखभाल से फसल हरी-भरी रहेगी और उपज बढ़ेगी।
किसानों के लिए सुनहरा अवसर
शलजम की PTWG किस्म अपनाकर रबी सीजन में किसान अपनी आय को नई ऊँचाई दे सकते हैं। कम लागत और जल्दी तैयार होने वाली यह फसल छोटे किसानों के लिए वरदान है। एनएससी से बीज मँगवाकर शुरू करें और बाजार में अच्छे दाम पाएँ। अगर कोई सवाल हो, तो नजदीकी कृषि केंद्र से सलाह लें। यह फसल न सिर्फ मुनाफा देगी, बल्कि आपके खेत को विविधता भी लाएगी।
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