पशुपालक सावधान! 22 जनवरी से शुरू होगा खुरपका-मुंहपका टीकाकरण अभियान

जिला पशुपालन विभाग ने मुंहपका और खुरपका रोग (Foot and Mouth Disease – FMD) से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। ये अभियान 22 जनवरी 2026 से शुरू होकर कई चरणों में चलेगा। विभाग का लक्ष्य है कि जिले के 10 लाख से ज्यादा गाय, भैंस, बकरी और भेड़ों को मुफ्त टीका लगाया जाए। FMD रोग से पशुओं में मुंह में छाले, खुरों में सूजन और दूध उत्पादन में भारी गिरावट आती है। ये रोग एक बार फैल जाए तो पूरा पशुधन प्रभावित हो सकता है।

पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभियान में सरकारी पशु चिकित्सक, पैरा-वेट और स्थानीय टीम घर-घर जाकर टीकाकरण करेंगे। टीका पूरी तरह मुफ्त है और कोई भी पशुपालक इसका लाभ उठा सकता है। अभियान के दौरान पशुओं की जांच भी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर अन्य दवाइयां और सलाह भी दी जाएगी।

अभियान का पूरा शेड्यूल और ब्लॉक-वार कार्यक्रम

अभियान 22 जनवरी से शुरू होकर फरवरी के अंत तक चलेगा। पहले चरण में ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। विभाग ने ब्लॉक-वार शेड्यूल जारी किया है:

  • ब्लॉक लोनी और मुरादनगर – 22 से 31 जनवरी तक
  • ब्लॉक गढ़ी और दासना – 1 से 10 फरवरी तक
  • ब्लॉक मॉडीनगर और राजेंद्रनगर – 11 से 20 फरवरी तक
  • शहरी क्षेत्र (गाजियाबाद शहर) – 21 फरवरी से अंत तक

प्रत्येक ब्लॉक में 50 से ज्यादा शिविर लगाए जाएंगे। शिविरों की सूची पंचायतों, ग्राम प्रधानों और पशु चिकित्सालयों पर लगाई जाएगी। किसान भाई अपने ब्लॉक के पशु चिकित्सालय से संपर्क करके सटीक तारीख और जगह पता कर सकते हैं।

FMD रोग से बचाव क्यों जरूरी और टीकाकरण के फायदे

FMD एक वायरल रोग है जो पशुओं में तेजी से फैलता है। इससे पशु खाना-पीना छोड़ देते हैं, दूध उत्पादन 50-70% तक गिर जाता है और कई बार मौत भी हो जाती है। टीकाकरण से रोग का खतरा 90% तक कम हो जाता है। टीका लगवाने से पशु स्वस्थ रहते हैं, दूध उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आर्थिक हानि रुकती है।

अभियान में शामिल होने के लिए पशुपालकों को सिर्फ पशु लेकर शिविर पर पहुंचना है। टीका लगवाने में कोई शुल्क नहीं है। विभाग की टीम घरों में भी पहुंचकर टीकाकरण कर रही है।

किसान भाइयों के लिए जरूरी सलाह

पशुपालक भाइयों, अगर आपके पास गाय, भैंस, बकरी या भेड़ है तो 22 जनवरी से शुरू होने वाले अभियान में जरूर शामिल हों। टीका लगवाने से पहले पशु की अच्छी जांच करवाएं। टीका लगने के बाद 21 दिनों तक पशु को अलग रखें और अन्य पशुओं से संपर्क न होने दें।

अगर आपके इलाके में शिविर की जानकारी नहीं मिल रही है तो नजदीकी पशु चिकित्सालय या जिला पशुपालन कार्यालय से संपर्क करें। ये अभियान आपके पशुओं की सुरक्षा और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए है।

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  • Shashikant

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